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बगुली ने वार किया / केदारनाथ अग्रवाल


बगुली ने वार किया
पंजे से
चोंच से
प्रहार किया
मछली को
मार लिया
घुटक गई
पेट में उतार लिया
सागर ने
रोष किया,
दोष दिया
बगुली को;
मछली का
शोक किया;
बाड़व को बढ़ने से रोक दिया।

रचनाकाल: २९-११-१९६७