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मृत्यु / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल

मृत्यु
(निराशा में भी आशा का चित्रण)
ट जटिल पहेली यह
न समझने में कुछ आयी
किस ने मृत्यु बनाई?
किसने व्यथा बनायी?
और बनायी किसने
स्मित की शीत किरण है
कभी सोचता हूँ मैं
व्यर्थ हुआ जीवन है
(मृत्यु कविता का अंश)