जैसे कुछ खोए और खोकर वह मिले नहीं
फिर भी उस खोए की याद बस रहे
वैसे तुम खोयीं मैं खोया
खोकर फिर मिले नहीं आपस में
याद ही बच रही।
रचनाकाल: ०३-१०-१९६०
जैसे कुछ खोए और खोकर वह मिले नहीं
फिर भी उस खोए की याद बस रहे
वैसे तुम खोयीं मैं खोया
खोकर फिर मिले नहीं आपस में
याद ही बच रही।
रचनाकाल: ०३-१०-१९६०