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|रचनाकार=सत्यप्रकाश जोशी |संग्रह=राधा / सत्यप्रकाश जोशी
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<Poempoem>
रूकमणीजी म्हारै कांई लागै ?
ल्होड़ी सोक ?
कांन्ह नै
छाती सूं लगाय
आंचळ में कुण ढांपियौ ?
म्हैं कांन्ह री साथण हूं,
कै मां हूं, कै बै‘न हूं,
कै बहू हूं, कै वायली हूं,
म्हैं खुद नीं जांणूं तौ कांई बताऊं !
पण रूकमणीजी तौ कोरी परणी
नीं बै‘न, नीं साथण, नीं वायेली,
म्हारी वांसूं कांई बिरोबरी ! </Poempoem>