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तइहा के सब बइहा ले गय / बुधराम यादव
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21:23, 27 अक्टूबर 2016
अब अतंस करलावत हे!
माड़ी भर धुर्राये धरसा
गदफद
*
चिखला मातय!
चार महीना चौमासा ल
सजा बरोबर काटंय!
मुरूम भांठा डोंगरी पहरी
नदिया खंड़ के रेती!
बड़े असामी
*
मन बर हो गंय
जनव अनाथिन बेटी!
धन बल अउ सरकार के सह म
बिघवा चितवा नरवा झोरकी
तीर म माड़ा
*
छावंय!
छेरिया बोकरी बछरू पठरू
सुन्ना पा धर खावंय!
हिरना मिरगा सांभर चीतर
खेतखार मेछरावंय
*
!तरिया नदिया घठौंदा
*
म
पानी पीये आवंय!
मनखे के मारे जंगल म
बपुरा जीव लुकावत
*
हें!
तइहा के सब बइहा ले गय
चाहंय करंय सवारी!
अन्न धन्न भरपूर तभो
दर्रा
*
घोटों
*
उन खावंय!
दूध दही धी बरा सोहारी
पहुंना पही जेवावंय!
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