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घर / ज्ञानेन्द्रपति
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14:28, 28 दिसम्बर 2008
<Poem>
दीवसर
दीवार
में जड़ी
काँच की अलमारी मे
नेत्र-तल पर खड़ी
अनिल जनविजय
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