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मुझको भी तरकीब सिखा / गुलज़ार
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13:56, 16 अगस्त 2006
अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब
कोइ
कोई
तागा
टुट
टूट
गया या खत्म हुआ
फिर से बांध के
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गांठ
गिराह
गिरह
बुन्तर की
देख नहीं सकता कोई
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पूर्णिमा वर्मन