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[[Category:गज़ल]]
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तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं
मगर ये लोग पागल हो गये हैं
तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं<br>बहारें लेके आये थे जहाँ तुममगर ये लोग पागल वो घर सुनसान जंगल हो गये हैं<br><br>
बहारें लेके आये थे जहाँ तुम<br>यहाँ तक बढ़ गये आलाम-ए-हस्तीवो घर सुनसान जंगल कि दिल के हौसले शल हो गये हैं<br><br>
यहाँ कहाँ तक बढ़ गये आलाम-ए-हस्ती<br>ताब लाये नातवाँ दिलकि दिल के हौसले शल सदमे अब मुसलसल हो गये हैं<br><br>
कहाँ तक ताब लाये नातवाँ दिल<br>निगाह-ए-यास को नींद आ रही हैकि सदमे अब मुसलसल मुसर्दा पुरअश्क बोझल हो गये हैं<br><br>
निगाह-ए-यास को नींद आ रही है<br>उन्हें सदियों न भूलेगा ज़मानामुसर्दा पुरअश्क बोझल यहाँ जो हादसे कल हो गये हैं<br><br>
उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना<br>यहाँ जो हादसे कल हो गये हैं<br><br> जिन्हें हम देख कर जीते थे "नासिर"<br>वो लोग आँखों से ओझल हो गये हैं<br><br/poem>
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