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गंगा / सुमित्रानंदन पंत
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09:21, 4 मई 2010
विश्रुत हिम पर्वत से निर्गत,
किरणो्ज्वल
किरणोज्वल
चल कल ऊर्मि निरत,
:यमुना, गोमती आदी से मिल
होती यह सागर में परिणत।
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