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बातें करें-1 / विजय वाते

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{{KKRachna
|रचनाकार=विजय वाते
|संग्रह= ग़ज़ल / विजय वाते
}}
<poem>
आओ मिल के दो घड़ी संसार की बातें करें,
कुछ करें शिकवे-गिले कुछ प्यार की बातें करें ।

हो चुका जो हो रहा है फ़िक्र उसकी ख़ूब की,
इन सभी से बन रहे आसार की बातें करें ।

जो मिला जब-जब मिला दुनिया के गम ले कर मिला,
आज मन है आपसे घरबार की बातें करें ।

अब बड़े घर मे बुजुर्गों के नहीं तामीरदार,
आओ मिल के उनसे कुछ उपचार की बातें करें ।

छत के गुण गाते हैं हम जो दे रही है आसरा,
छत टिकी काँधे पे जिस दीवार की बातें करें ।
</poem>