Last modified on 16 दिसम्बर 2020, at 20:05

साँझ का सूरज / ज्योति रीता

प्रकृति के विपरीत
सांझ का सूरज बन
उग हो तुम

हर नियम को ताक पर रख
हर जकड़न को तोड़
छोड़ सारी पाबंदी
अपनी मनमर्जी कर आए हो तुम

बहुत हुआ
तपना-तपाना
बहुत हुआ
जगना-जगाना
छोड़ सारे रीत पुराने
छोड़ सारे रिश्ते बेगाने

जीवन ताल पीछे छोड़
वक्त को मोड़ आए हो तुम
सुबह के बदले
शाम को उग आए हो तुम॥