हमको दुखी देखकर प्यारे तनिक दुःख यदि हैं पाते।
अति अपराधी, क्यों न हमारे सभी मनोरथ मर जाते॥
क्यों न सदा हम सुखी परम हो उन्हें खूब सुख पहुँचाते।
क्यों न सदा प्रसन्नमुख हँस-हँस कर हम उन्हें हँसा पाते॥
हमको दुखी देखकर प्यारे तनिक दुःख यदि हैं पाते।
अति अपराधी, क्यों न हमारे सभी मनोरथ मर जाते॥
क्यों न सदा हम सुखी परम हो उन्हें खूब सुख पहुँचाते।
क्यों न सदा प्रसन्नमुख हँस-हँस कर हम उन्हें हँसा पाते॥