Last modified on 23 दिसम्बर 2010, at 19:13

सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर/ गुलज़ार

Venus**** (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:13, 23 दिसम्बर 2010 का अवतरण

सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर

चमकती चिंगारियाँ-सी चकरा रहीं आँखों की पुतलियों में

नज़र पे चिपके हुए हैं कुछ चिकने-चिकने से रोशनी के धब्बे

जो पलकें मुँदूँ तो चुभने लगती हैं रोशनी की सफ़ेद किरचें


मुझे मेरे मखमली अँधेरों की गोद में डाल दो उठाकर

चटकती आँखों पे घुप अँधेरों के फाये रख दो

यह रोशनी का उबलता लावा न अन्धा कर दे.