Last modified on 14 जनवरी 2011, at 11:32

एक और दिन हुआ / केदारनाथ अग्रवाल

Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 11:32, 14 जनवरी 2011 का अवतरण ("एक और दिन हुआ / केदारनाथ अग्रवाल" सुरक्षित कर दिया ([edit=sysop] (indefinite) [move=sysop] (indefinite)))

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

एक और दिन हुआ
तमाम दिन आदमी खोजता रहा एक और कुआँ
कुएँ में खोजता रहा पानी
अब पानीदार होने के लिए
मरते दम तक
जिंदगी का बोझ ढोने के लिए
एक और दिन हुआ
आदमी का मुँह फिर
हुआ धुआँ-धुआँ

रचनाकाल: १९-०६-१९७६, मद्रास