पैसा
दिमाग में वैसे
सुअर
जैसे हरे खेत में
बाप
अब बाप नहीं
पैसा
अब बाप है
पैसे
की सुबह
और
पैसे
की शाम है
दुपहर की भाग-दौड़ पैसा है
पैसे के साथ पड़ी रात है
रचनाकाल: ३०-०१-१९६९
पैसा
दिमाग में वैसे
सुअर
जैसे हरे खेत में
बाप
अब बाप नहीं
पैसा
अब बाप है
पैसे
की सुबह
और
पैसे
की शाम है
दुपहर की भाग-दौड़ पैसा है
पैसे के साथ पड़ी रात है
रचनाकाल: ३०-०१-१९६९