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घड़ी’क रोवै घड़ी’क गावै सांस / सांवर दइया

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घड़ी’क रोवै घड़ी’क गावै सांस
नित नुंवा तमाशा दिखावै सांस

आप तो पिदै कोनी घड़ी भर ई
मिनख नै अष्टपौर पिदावै सांस

बादळ देख नाचै ऐ मोर जिंयां
थे आवो तो नाचै-गावै सांस

‘खो’ मिलतां ई भागै छोरो जिंयां
सांस लारै भागती आवै सांस


लागै थांरी आदत सीखगी आ
आवण री कह कोनी आवै सांस