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कौन हूँ मैं / वर्तिका नन्दा

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इस बार नहीं डालना
आम का अचार
नहीं ख़रीदनी बर्नियाँ
नहीं डालना धूप में
एक-एक सामान

नहीं धोने ख़ुद सर्दी के कपड़े
शिकाकाई में डाल कर

न ही करनी है चिंता
नीम के पत्ते
ट्रंक के कोनों में सरके या नहीं

इस बार नींबू का शरबत भी
नहीं बनाना घर पर
कि ख़ुश हों ननदें-देवरानियाँ
और माँगें कुछ बोतलें
अपने लाडले बेटों के लिए

नहीं ख़रीदनी इस बार
गार्डन की सेल से
ढेर-सी साड़ियाँ
जो आएँ काम
साल भर दूसरों को देने में

इस साल कुछ अलग करना है
नया करना है
इस बार जन्म लेना है
पहली बार सलीक़े से
इस बार जमा करना है सामान
सिर्फ़ अपनी ख़ुशी का
थोड़ी मुस्कान
थोड़ा सुकून
थोड़ी नज़रअंदाज़ी और
थोड़ी चुहल
लेकिन यही प्रण तो पिछले साल भी किया था न