भूल गए हैं वो रंजिश में
गंध नहीं रहती बंदिश में
मालामाल हुई हैं आँखें
चाहे आँसू हों गर्दिश में
चाँद-सितारों की दुनिया भी
शामिल है उनकी साज़िश में
कितनी आँखें हैं बादल की
सोच रहा था वो बारिश में
कैसा पद क्या मान-प्रतिष्ठा
शर्म नहीं रहती ख़ारिश में