भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

ग़रीब देश-1 / पवन करण

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:59, 28 अक्टूबर 2012 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=पवन करण |संग्रह= }} {{KKCatKavita‎}} <Poem> आपके द...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आपके दिए इस नाम ने मुझे
अपना असली नाम भुला दिया है

आप मेरे लिए सहायता भेजते हैं
डालर मंज़ूर करते है पीछे-पीछे
आपकी कँपनियाँ चली आती हैं

मुझे ज़बरदस्ती हथियार बेचकर
भाग जाते हैं आपके भेजे डालर
में रोटियों में नहीं बदल पाता हूँ
मेरा ख़ाली पेट मेरी पहचान है
और मेरी भू़ख मेरी गाथा

मैने बरसों से भर-पेट नहीं खाया
बहुत कमज़ोर हूँ मैं, जो आपकी कँपनियाँ
मेरे हाथों में थमा जाती हैं
उन बंदूकों को पकड़कर
मैं खड़ा तक नहीं हो पाता हूँ