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बरक्कति / ककबा करैए प्रेम / निशाकर

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अहाँ
धरतीक स्वर्ग नहि बना सकै छी
कोनो बात नहि
मुदा
अहाँ
अपन कर्मसँ एकरा नहि बनाबी
नरक
निरमल रखियैक नेत
किएक तँ
नेत गुणे बरक्कति होइत छै।