आज प्रणय हो जाने दो / भावना तिवारी

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अधरों से गीत, मिल जाने दो,
साँसों में प्रीत, घुल जाने दो,
मेरी पीड़ा में आज प्राण,
निज दर्द विलय हो जाने दो!
प्रिय आज प्रणय हो जाने दो!
प्रिय आज प्रणय हो जाने दो!

पलकों के मण्डप के नीचे,
फ़िर अश्रु-बराती बन आए!
आँखों में नींद नहीं आई,
सपने अब तक हैं अनब्याहे!
मंत्रों के पूरे होने तक,
फ़िर आज हृदय खो दो!
प्रिय आज प्रणय हो जाने दो!

मेरे भीतर दम तोड़ रहीं,
अनगिन आशाओं की गुडियाँ
जाने किसने विश्वास छला,
अमृत में दीं विष की पुड़ियाँ
जीवन की अब अभिलाषा क्या?
यह प्रेम अभय हो जाने दो
प्रिय आज प्रणय हो जाने दो

गालों तक ढलके आँसू अलि,
तेरी सूरत में ढल जाएँ!
केवल अवशेष रहे इतना,
हम नीर–क्षीर से मिल जाएँ!
चाहों के पात हिले मन में,
दृग-नीर-निलय हो जाने दो!
प्रिय आज प्रणय हो जाने दो!

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