सूरज के बारे में
कुछ भी नहीं जानता
अपने अंधेरे में
अकेली मौत मरता हुआ
वक़्त
जबकि ऎन दोपहरी है
उसकी पत्थर-नक़ाबों के बाहर।
(रचनाकाल : 22.03.1980)
सूरज के बारे में
कुछ भी नहीं जानता
अपने अंधेरे में
अकेली मौत मरता हुआ
वक़्त
जबकि ऎन दोपहरी है
उसकी पत्थर-नक़ाबों के बाहर।
(रचनाकाल : 22.03.1980)