Last modified on 25 जुलाई 2020, at 12:55

हमारे दादा जी / कमलेश द्विवेदी

सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:55, 25 जुलाई 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=कमलेश द्विवेदी |अनुवादक= |संग्रह= }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

सीधे-सादे नेक हमारे दादा जी.
लाखों में हैं एक हमारे दादा जी.

हमें खिलाते लड्डू-पेड़ा-रसगुल्ला,
टॉफी-बिस्कुट-केक हमारे दादा जी.

सैर करायें-कहें कहानी-सँग खेलें,
करते काम अनेक हमारे दादा जी.

चाहे जितना खेलें उधम मचायें हम,
नहीं लगाते ब्रेक हमारे दादा जी.

पापा-मम्मी डाँटे मारें ग़लती पर,
क्षमा करें मिस्टेक हमारे दादा जी.