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स्‍थान देवता - 1 / संतोष अलेक्स

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अचानक हुई बारिश से
मिट्टी की सोंधी गंध
दस्‍तक दे रही है नाक में

नारियल के टुकड़़े बिखरे पड़े हैं
लोगों की आवा जाही
न के बराबर है
सदियों पुरानी मंदिर की देवी
हमेशा की तरह प्रसन्‍न मुद्रा में थी
शाम हुई, रात भी
गहरी नींद में हैं गाँववासी
जागता है गाँव देवता रात भर