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संस्कृति / मनोज भावुक

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एक ओर
कुकुरमुत्ता नियर फइलल
भकचोन्हर गीतकारन के बिआइल
कैसेट में
लंगटे होके नाचत बिया
भोजपुरिया संस्कृति।
(जइसे उ कवनो
कोठावाली के बेटी होखे भा
कवनो गटर में फेंकल मजबूर
लइकी के नाजायज औलाद।)

दुसरा ओर,
लोकरागिनी के किताब में कैद भइल
भोजपुरिया संस्कृति के दुलहिन के
चाटत बा दीमक, सूंघत बा तेलचट्टा

आ काटत बा मूस।
आ एह दू नू का बीचे
भोजपुरी के भ्रम में हिन्दी के सड़ल
खिचड़ी चीखत आ
भोजपुरिये के जरल भात खात
मोंछ पर ताव देत
'मस्त-मस्त' करत
खाड़ बा, भोजपुरिया जवान