Last modified on 2 अप्रैल 2009, at 06:14

मूल मंत्र / शैल चतुर्वेदी

Pratishtha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 06:14, 2 अप्रैल 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=शैल चतुर्वेदी |संग्रह=चल गई / शैल चतुर्वेदी }} <poem> ::...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

हमारे देश का प्रजातंत्र
वह तंत्र है
जिसमें कर बिमारी स्वतंत्र है
दवा चलती रहे, ईमार चलता रहे-
यही मूल-मंत्र है।
फलवाले से कहा :"उपर से देखने में चिकना है
भगवान जाने रस कितना है।"
तो बोला: " गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है
कर्म करो और फल मुझ पर छोड़ दो।
हल दोनो ने अपना-अपना कर्म किया
मैंने दिया और आपने लिया
अब फल अच्छा निकले या खराब
यह तो हरि इच्छा है जनाब।"
डॉक्टर से कहा:"आँख है तो ज़िन्दगी है
एक गई दूसरी बची है।"
तो बोला:"लोग बाग बिना बोर्ड पढ़े
चेम्बर में घुस आते हैं
शर्म नहीं आती
नाक वाले डॉक्टर को
आँख दिखाते हैं।"
दर्ज़ी से कहा:"कुर्ता पेट पर टाइट सिला है।"
तो बोला:"कपड़ा क्या आपको
प्रेज़ेंट मिला है
पानी में डालते ही आधा रह गया
अब जैसा बना है ले जाइए
कुर्ते को पेट के लायक नहीं
पेट को कुर्ते के लायक बनाइए।"
पान वाले से कहा:"पाँच रुपये का पान
कहाँ जाएगा हिन्दुस्तान?"
तो बोला:"खा कर तो देखिए श्रीमान
आत्मा खिल जाएगी
हमारे पाँच की पीक
शहर के हर कोने में मिल जाएगी।"
किताब वाले से पूछा:"हरिवंश राय बच्चन का चित्र है?"
तो बोला: "आपका टेस्ट भी विचित्र है
वर्तमान को
भूतकाल के कन्धे पर टांग रहे है
बेटे के ज़माने में बाप का चित्र मांग रहे हैं।"
लेखक से कहा: " यार कुछ ऐसा लिखो
कि भीड़ से अलग दिखो।"
तो बोला:"जैसा बनता है लिख रहे हैं
यही क्या कम है
कि हमारे जासूसी उपन्यास
रामायण से ज्यादा बिक रहे हैं।"
दुकानदार से कहा:"यार ठीक से तौलो"
तो बोला:"तौलने के बारे में कुछ मत बोलो
ज़िन्दगी भार यही किया है
ग्राहक को तौल से ज्यादा दिया है
आप पहले है जो बोल रहे हैं
वर्ना कोई नहीं देखता
कि हम क्या तौल रहे है।"
नौकरानी से कहा:"एक तो बर्तन चुराती हो
उपर से आँख दिखाती हो।"
तो बोली:दिखा तो आप रहे हैं
बर्तन मलवाओ,न मलवाओ
चोरी का इल्ज़ाम मत लगाओ
हमें पता है
कि आप कितने बड़े है
आधे बर्तनो पर तो
पड़ोसियों के नाम पड़े है।"
बेटे से कहा:"बाल मत बढ़ाओ"
तो बोला:"पापाजी आदर्श का पाठ मत पढाओ
हम ज़माने के साथ चल रहे है
आपके बाल नहीं है न
इसलिए आप जल रहें हैं।"
बीबी से कहा:"पति हूँ,चपरासी नहीं।"
तो बोली:"पत्नी हूँ, दासी नहीं
बाहर की भगवान जाने
घर में मेरी चलेगी
चिराग लेकर ढूंढने से भी
ऐसी बीबी नहीं मिलेगी।"
बेटी से कहा:"इतनी रात को कहाँ जा रहीं हो?"
तो बोली:"टोको मत जाने दो
आपसे तो दामाद फँसा नहीं
मुझे ही फँसाने दो।"