- रायुपर बिलासपुर संभाग / विनोद कुमार शुक्ल
- टहलने के वक़्त / विनोद कुमार शुक्ल
- विचारों का विचार इस तरह हुआ-- / विनोद कुमार शुक्ल
- तीन मीटर ख़ुशबू के अहाते उगा हुआ गुलाब / विनोद कुमार शुक्ल
- शरारतन मैंने मुड़कर देखा एक पेड़ को / विनोद कुमार शुक्ल
- लगभग जयहिंद / विनोद कुमार शुक्ल
- कितना कुछ नुक़सान हानि / विनोद कुमार शुक्ल
- काम पर जाती हुई औरत / विनोद कुमार शुक्ल
- जिस सड़क पर मैं चला गया / विनोद कुमार शुक्ल
- आरपार शायद इसी को कहते हैं / विनोद कुमार शुक्ल