पथराई गली पर बूटों की
खिट खिट निरंतर
टिक टिक टप टप हुम्म
बोझा ढोते खच्चर
कुछ आवाज़ें टिटकराने की
कुछ फुसफुसाहतें
कुछ दबी-घुटी हंसी
ओसारे में सोई चिढ़िया की
नींद में ख़लल डालती है।
पथराई गली पर बूटों की
खिट खिट निरंतर
टिक टिक टप टप हुम्म
बोझा ढोते खच्चर
कुछ आवाज़ें टिटकराने की
कुछ फुसफुसाहतें
कुछ दबी-घुटी हंसी
ओसारे में सोई चिढ़िया की
नींद में ख़लल डालती है।