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एक अम्लान सूर्य होता है / विनोद तिवारी
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एक अम्लान सूर्य होता है
सत्य पर आवरण नहीं होता
लोग कुछ इस तरह भी जीते हैं
मौत से भी मरण नहीं होता
उम्र यूँसौ बरस की होती है
एक पर अपना क्षण नहीं होता
सुख तो सब लोग बाँट लेते हैं
दुख का हस्तांतरण नहीं होता
लोग सीता की बात करते हैं
राम-सा आचरण नहीं होता
दीख भर जाए कोई काँचन मृग
लोभ का संवरण नहीं होता