Last modified on 28 मई 2010, at 18:26

मेरी आत्मा जो कि तुम्हारी / सुमित्रानंदन पंत

Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:26, 28 मई 2010 का अवतरण ("मेरी आत्मा जो कि तुम्हारी / सुमित्रानंदन पंत" सुरक्षित कर दिया ([edit=sysop] (indefinite) [move=sysop] (indefinite)))

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

मेरी आत्मा जो कि तुम्हारी
प्रीति सुरा की पीती धार,
भटक रही किस रोष दोष वश
वह इस जग में बारंबार!
पहले तुमने कभी न ऐसा
नाथ, किया निर्मम व्यवहार,
भोग रही वह आज दंड क्यों,
वहन कर रही जीवन भार!