Neeraj Daiya(चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:34, 6 अगस्त 2010 का अवतरण (नया पृष्ठ: <poem>गहरा ही सही अथाह रेत के गर्भ में फूटता छलछलाता मिल ही तो जाता है …)
(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
गहरा ही सही
अथाह रेत के गर्भ में
फूटता छलछलाता
मिल ही तो जाता है
पानी
अटूट पानी.....