आज वैसा मन कहाँ है
देख वो दरपन कहा है
ख़्वाब के आगे चलें तो
रास्ता रौशन कहाँ है
ये इमारत की बुलंदी
वो खुला आँगन कहाँ है
जून है या जनवरी अब
भीगता सावन कहाँ है
साँप चंदन घिस रहे हैं
आपको चंदन कहाँ है