♦ रचनाकार: अज्ञात
काहे न बोले दुलहिन लाल सेॅ
काहे न बोले तुम लाल सेॅ।1॥
सेजिया लगा दे गेना<ref>गेंदा; एक फूल</ref> हजार सेॅ
काहे न बोले तुम लाल सेॅ।2॥
बेनिया डोला दे चंपा डाल के।
काहे न बोले दुलहिन लाल सेॅ।3॥
घूँघट उठा के मोतियन जाल के।
काहे न बोले तुम लाल सेॅ।4॥
-यह गीत मुस्लिम परिवारों में भी प्रचलित है।
शब्दार्थ
<references/>