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कोरोना-1 / संतोष श्रीवास्तव
Kavita Kosh से
इन दिनों ख़ौफ़
और सन्नाटे से भरी हैं
सड़कें , मॉल ,सिनेमाघर
बाजार ,मंदिर,
गिरजाघर, गुरुद्वारे
एक कातर आवाज़
पुलिस की गाड़ियों के
सायरन से गूंजती है
घर से मत निकलिए
कोरोना महामारी
आपके इंतज़ार में है
मौका पाते ही दबोच लेगी
यह कैसी दहशत
कि मनुष्य
धरती पर आने का
अपना धर्म न निभा पाए
कर्म भूल जाए
अवसाद कितना कटीला
जानलेवा कि
हर पल मौत का एहसास
चिंता अपनी नहीं
अपनों की है
जिन्हें
बड़ी मुरादों से पाया है
नहीं जानती कल क्या हो
गनीमत है
आज साँस चल रही है।