तोहरा के गऊवा के पीपर बुलावे।
आजा-आजा बलम जी परदेसिया॥
तोहरा के हमरा अचरवा बुलावे।
पेड़वा से कोयलिया गीतिया सुनावे॥
नीले अम्बर में लाहरेले केसिया॥
आजा-आजा बलम जी परदेसिया॥
सावन के झूला ना हमसे सहाला।
रउरा सजन जी कुछ ना बुझाला।
चिट्ठी भेजतानी हम अन्तर्देशिया॥
आजा-अजा बलम जी परदेसिया॥
तीज त्यौहार छठ कईसे मनाई।
अपनी सजनवा के कैसे भुलाई।
काहे हमके सतावेल रंग रसिया॥
आजा-आजा बलम जी परदेसिया॥