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चढ़त चैत चित चंचल कि / मैथिली लोकगीत

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

चढ़त चैत चित चंचल कि और चित चंचल हो
हो रे, कुसुम लेल पतझार श्याम नहि आयल हो
ककरा सँ चिठिया लिखाएब, ककरा पठायब हो
हो रे, के कहत मोनक बात, खबरिया हम जानब हो
कैथा सँ चिठिया लिखाएब, हजमा पठाएब हो
हो रे, हजमे कहत निजबात, खबरि हम जानब हो