छन्द - अमृत ध्वनि
संशय मन का मीत ना, जानत चतुर सुजान|
इस में कोई गुण नहीं, ये है अवगुण ख़ान||
ये है अवगुण ख़ान, करे नुकसान भयानक|
मान मिटावत, शान गिरावत, द्वेष प्रचारक|
द्वंद बढ़ावत, चैन नसावत, शांति करे क्षय|
मन भटकावत, जिय झुलसावत, बैरी संशय||