<poem>
उन्मन हैं मनचीते लोग,
वर्तमान के बीते लोग।लोग ।
भीतर -भीतर मर -मर कर,बाहर -बाहर जीते लोग।लोग ।
निराधार खून ख़ून देख करघूंट खून घूँट ख़ून के पीते लोग।लोग ।
और उधर जलसों की धूम
काट रहे हैं फीते लोग।लोग ।
भाव -शून्य शब्दों का कोश,बाँट रहे हैं रीते लोग।लोग ।
</poem>