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कहीं भी छोड़ के अपनी ज़मीं नहीं जाते
2
उम्र एक तल्ख़ हक़ीकत है मुनव्वर फिर भी
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मियाँ ! मैं शेर हूँ, शेरों की गुर्राहट नहीं जाती,
हमारी ज़िन्दगी का इस तरह हर साल कटता है
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