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03:46, 27 अगस्त 2020 {{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=पूजा प्रियम्वदा
|अनुवादक=
|संग्रह=
}}
{{KKCatKavita}}
<poem>
किसी हादसे का इंतज़ार मत करो
किसी के टुकड़े टुकड़े बिखरने तक
चुपचाप तमाशा मत देखो
पूछो, सुनो, महसूस करो
हाथ बढाओ
दोबारा पूछो
</poem>