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<poem>
छोटी-सी
अँजुरी में हम
सारा आकाश भरें ।
पोर -पोर में
सौ-सौ सूरज-
का उजियार भरें ।
आँसू की
धरती से निकलें
मुस्कानों की कोंपल,
अंगारों की
खिलें गोद में
संकल्पों के शतदल।
पलक-कोर पर
धूप-चाँदनी
नित सिंगार करें।
बन्धन के
महलों में घुटता
पाखी
व्याकुल मन का,
मिल जाए बस
कोई कोना
हमको निर्जन वन का।
जितना हो
सुख दे दें
जग को
जीभर प्यार करें ।
</poem>