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वे देखते हैं / अनुराधा पाटील / सुनीता डागा
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18:42, 21 अप्रैल 2024
फेंकते हैं
नाचते मोरों के सामने दाने
थपथपाते हैं भावहीनता और
ठण्डेपन
रूख़ेपन
के साथ
पस्त हो चुके इनसानों की पीठ
बड़ी धीर-गम्भीरता से
अनिल जनविजय
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