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हास्य-रस -एक / अकबर इलाहाबादी
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07:26, 18 जनवरी 2009
[[Category:ग़ज़ल]]
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दिल लिया है हमसे जिसने दिल्लगी के वास्ते
क्या तआज्जुब है जो तफ़रीहन हमारी जान ले
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शेख़ जी घर से न निकले और लिख कर दे दिया
आप बी०ए० पास हैं तो बन्दा बीवी पास है
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तमाशा देखिये बिजली का मग़रिब और मशरिक़ में
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