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बलिहार भयन हम उयि ब्यरिया,
तुम याक बिलायिति पास किह्यउ।
अभिलाखयि[1] खुब - खुब पूरि गयीं,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
बजरा का बिरवा तुम भूल्यउ
का आयि कर्याला तुम पूँछ्यउ,
छगरी[2] का भेड़ी कायसि कह्यउ,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
अकतही[3] अँगरखा खोलि धर्यउ,
कुरता अउ धोती छाँड़ि दिह्यउ,
यिहु पहिरि कमर-कटु कोटु चल्यउ,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
लरिका सब भाजयिं चऊँकि-चउँकि
रपटावयि कुतवा भउँकि भउँकि
तुम अजभुतु रूपु धर्यउ भय्या,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
बिल्लायि मेहरिया बिलखि-बिलखि
साथ की बँदरिया निरखि-निरखि;
यह गरे माँ हड्डी तुम बाँध्यउ,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
हम चितयी तुमका मुलुरू-मुलुरू,
मलकिनी निहारयिं भुकुरि-भुकुरि,
तुम मुँहि मा सिरकुटु [4] दाबि चल्यउ,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।
तुम कथा म सत्यिनरायन की
बूटयि पहिंदे पूजा कीह्यउ,
सोडा का चन्नामिर्तु किह्यउ,
जब याक बिलायिति पास किह्यउ।

शब्दार्थ
  1. अभिलाषायें
  2. बकरी
  3. ग्रामीण पुरूष का वस्त्र विशेष
  4. सिगरेट