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? / महादेवी वर्मा

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बुझा क्यों उनको जाती मूक,
भोर ही उजियाले की फूंक?
:::रजतप्याले में निद्रा ढाल,
:::बांट देती जो रजनी बाल;
:::उसे कलियों में आंसू घोल,
:::चुकाना पड़ता किसको मोल?
पोछती जब हौले से वात,
इधर निशि के आंसू अवदात;
उधर क्यों हंसता दिन का बाल,
अरुणिमा से रंजित कर गाल?
:::कली पर अलि का पहला गान,
:::थिरकता जब बन मृदु मुस्कान,
:::विफल सपनों के हार पिघल,
:::ढुलकते क्यों रहते प्रतिपल?
गुलालों से रवि का पथ लीप,
जला पश्चिम मे पहला दीप,
विहँसती संध्या भरी सुहाग,
दृगों से झरता स्वर्ण पराग;
:::उसे तम की बढ़ एक झकोर,
:::उड़ा कर ले जाती किस ओर?
 
</poem>
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