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अचल सरल उन्नत सुदिव्य वपु / हनुमानप्रसाद पोद्दार

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(राग जोगिया-ताल मूल)

अचल सरल उन्नत सुदिव्य वपु, कपिश-केश-चूड़ा नागेश।
 नीलकण्ठ, नासाग्र दृष्टि स्थिर, मुक्त-नाग हार गल देश॥
 क्रञेडस्थित कर-कमल, समुज्ज्वल ज्योति, प्राण-तन मन निस्पन्द।
 व्याघ्रचर्म-‌आसन शुचि शोभित शिव योगेश सच्चिदानन्द॥