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अड़वै री हाजरी / ओम पुरोहित कागद

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सूनो
सूको खेत
नीं मोठ
नीं बाजरी
पण
अड़वै री हाजरी
लगोलग।

काळ सूं पै’ली साल
फसल ही
रूखाळी सारू
रूप्यो हो अड़वो
गाभा ने उडीकै
जका लेयग्यो बायरियौ।