भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"अतीत बीता / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
पंक्ति 6: पंक्ति 6:
 
[[Category: सेदोका]]
 
[[Category: सेदोका]]
 
<poem>
 
<poem>
 +
52
 
अतीत बीता
 
अतीत बीता
 
क्यों रोया जाए सदा
 
क्यों रोया जाए सदा
पंक्ति 12: पंक्ति 13:
 
उसको आज सी लें
 
उसको आज सी लें
 
तुझे देख मुस्काएँ।
 
तुझे देख मुस्काएँ।
7
+
53
 
'मेरे अधर
 
'मेरे अधर
 
देखो मद से भरे
 
देखो मद से भरे
पंक्ति 19: पंक्ति 20:
 
धो उदासी मन की
 
धो उदासी मन की
 
हँसो चूम लो मुझे।
 
हँसो चूम लो मुझे।
8
+
54
 
बिछुड़े साथी,
 
बिछुड़े साथी,
 
जिनकी राहें मुड़ी
 
जिनकी राहें मुड़ी
पंक्ति 26: पंक्ति 27:
 
ग्रंथि-बन्धन किया
 
ग्रंथि-बन्धन किया
 
मन से मन सदा।
 
मन से मन सदा।
9
+
55
 
सूखी घास ही
 
सूखी घास ही
 
जले पलभर में
 
जले पलभर में
पंक्ति 33: पंक्ति 34:
 
हम ठहरे लौह
 
हम ठहरे लौह
 
पिंघलेंगे,जलें ना।
 
पिंघलेंगे,जलें ना।
10
+
56
 
तय किया था
 
तय किया था
 
हमने मिलकर
 
हमने मिलकर

21:47, 11 जून 2019 के समय का अवतरण

52
अतीत बीता
क्यों रोया जाए सदा
चलो आज तो जी लें
फटा जो दिल
उसको आज सी लें
तुझे देख मुस्काएँ।
53
'मेरे अधर
देखो मद से भरे
मैं रातभर जगी'
ऊषा यूँ बोली-
धो उदासी मन की
हँसो चूम लो मुझे।
54
बिछुड़े साथी,
जिनकी राहें मुड़ी
जहाँ खिली चाँदनी;
साथ वे बचे
ग्रंथि-बन्धन किया
मन से मन सदा।
55
सूखी घास ही
जले पलभर में
ईर्ष्यालु जन -जैसी
बचे रहेंगे
हम ठहरे लौह
पिंघलेंगे,जलें ना।
56
तय किया था
हमने मिलकर
फूलों- सा खिलकर,
जुदा न होंगे
भूल गए हो तुम
राह देखते हम।
-0-