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अदम सुकून में जब कायनात होती है / अदम गोंडवी

'अदम' सुकून में जब कायनात होती है ।
कभी-कभार मेरी उससे बात होती है ।

कहीं हो ज़िक्र अक़ीदत[1] से सर झुका देना,
बड़ी अज़ीम[2] ये औरत की ज़ात होती है ।

उफ़ुक[3] पे खींच दे पर्दा, चराग़ जल जाए,
हम अगर सोच लें तो दिन में रात होती है ।

नवीन जंग छिड़ी है इधर विचारों में,
रोज़ इस मोर्चे पर शह व मात होती है ।

समझ के तन्हा न इस शख़्स को दावत देना,
'अदम' के साथ ग़मों की बरात होती है।

शब्दार्थ
  1. श्रद्धा-आस्था
  2. महान्
  3. क्षितिज