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अनभिव्यक्त / वाल्ट ह्विटमैन / दिनेश्वर प्रसाद

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कोई यह कहने का साहस कैसे कर सकता है ?
गाथाचक्रों, कविताओं, गायकों, नाटकों,
गर्वीले आयोनिया के, भारत के होमर, शेक्सपीयर बहुत-बहुत दीर्घ कालों के
सघन बिन्दुकित मार्गों, क्षेत्रों, तारों के दीपित समूहों और आकाशगंगाओं
प्रकृति के लब्ध स्पन्दनों
सभी पूर्ववर्ती मनोभावों, नायकों, युद्ध, प्रेम, आराधना,
अपनी अधिकतम गहराइयों तक सभी युगों के गहनतामापकों, साहुलों
सभी मानव प्राणियों, कंठों, इच्छाओं, मस्तिष्कों — सभी अनुभवों के कथनों के बाद,
दीर्घ या लघु, सभी भाषाओं, सभी देशों के अगणित गीतों के बाद;
तब भी अब तक नहीं कहीं गयी कविता के स्वरों या मुद्रण में —
ऐसा भी छूटा हुआ है
(कौन जानता है? अब तक अनभिव्यक्त सर्वोत्तम और छूटे हुए को ?)

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : दिनेश्वर प्रसाद

लीजिए, अब यही कविता मूल अँग्रेज़ी में पढ़िए
                Walt Whitman
             The Unexpressed

How dare one say it?
After the cycles, poems, singers, plays,
Vaunted Ionia's, India's — Homer, Shakespeare — the long, long times, thick
dotted roads, areas,
The shining clusters and the Milky Ways of stars — Nature's pulses reaped,
All retrospective passions, heroes, war, love, adoration,
All ages' plummets dropped to their utmost depths,
All human lives, throats, wishes, brains — all experiences' utterance;
After the countless songs, or long or short, all tongues, all lands,
Still something not yet told in poesy's voice or print — something lacking,
(Who knows? the best yet unexpressed and lacking.)